परियों की बारात जादुई परियों की कहानी | Hindi Kahaniyan

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परियों की बारात जादुई परियों की कहानी

परियों की बारात जादुई परियों की कहानी : बहुत समय पहले की बात है , धरती की जंगलों में जादूगरनियों की बस्ती हुआ करती थी। ये सभी जादूगरनियाँ इंसानो को मारकर उन्हें खाने वाली बुरी जादूगरनियाँ थी। जब भी कोई किस्मत का मारा या कोई रही भुला भटका हुआ उस जंगल से गुजरता, तो ओ जादूगरनियाँ उसे पकड़ कर बस्ती में ले जाती थी और फिर सभी जादूगरनियाँ मिलकर उसे मार कर खा जाती थी।

फिर एक दिन रानी परी की तीन बेटियां धरती पर रहने वाले तीन राजकुमार से शादी करके उनके साथ जा रही थी। थोड़ी देर बाद उनकी बारात उसी बस्ती वाले जंगल से होकर गुजरती है। जहाँ उन जादूगरनियों का बसेरा था। तभी पेड़ का डाली पर बैठी एक जादूगरनी परियों की जाती बारात को देख लेती है। इसके बाद वह बस्ती में जाकर बाकी सभी जादूगरनियों को इस बारात के बारे में बता देती है। इसकी बात सुनकर सभी जादूगरनियाँ बस्ती से निकलकर बारात का रास्ता रोक लेती है।

इन सभी जादूगरनियों को देख रानी पारी की एक बेटी बोलती है “अरे अचानक से यहाँ इतनी सारी जादूगरनियाँ कहाँ से आ गयी। “

तभी राजकुमार बोलता है , ये सभी बुरी जादूगरनियाँ है। ये इंसानो को मारकर खा जाती है और लगता है ये हमें पकड़ने आयी है।

तभी एक जादूगरनी कहती है :- हाँ।, तुमने बिलकुल सही कहा हम तुम सब में से किसी को जिन्दा नहीं छोड़ेगे। तुम सब को पकड़ कर अपने साथ ले जायेंगे।

ऐसा सुनकर रानी परी की बेटी कहती है की देखो हम तीनो रानी परी की बेटियां हैं , अगर तुमने हम में से किसी को भी नुक्सान पहुंचाया तो हमारी माँ तुम्हे नहीं छोड़ेगी। इसलिए अगर तुम सब अपनी भलाई चाहते हो तो यहाँ से लौट जाओ।

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इसके बाद जादूगरनी कहती है, हम किसी रानी परी से नहीं डरते हैं यह हमारा इलाका है और यहाँ हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। इसके बाद सभी जादूगरनियाँ बरात सहित इन सब को अपनी बस्ती की तरफ ले जाने लगते हैं। तभी वहां से गुजर रही दो सहेलियां ये सब देख लेती हैं और ये सभी बात परी देश पहुँच कर रानी परी को बता देती हैं। इसके बाद रानी परी अपनी जादुई कालीन पर सवार होती हैं और सीधा उड़ते हुए जादूगरनियों की बस्ती में पहुँच जाती है। वहां पहुँचने के बाद रानी परी उन जादूगरनियों से कहती है , की अगर तुम अपनी सलामती चाहती हो तो अभी तुरंत हमारी तीनो बेटियों, दामादो और इन सभी लोगो को तुरंत आजाद करदो नहीं तो मैं तुम्हारी इस बस्ती को जला कर राख कर दूंगी। इतना कह कर रानी परी अपनी जादुई छड़ी निकाल लेती है लेकिन तभी एक कौआ उड़ता हुआ आता है और रानी परी की छड़ी लेकर एक दाल पर बैठ जाता है।

यह देख सभी जादूगरनियाँ हसने लगती है और कहती है :- हा-हा-हा…… बिना जादुई छड़ी के यह हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती है। अब हम इन सब के साथ इसे भी मार कर खा जाएंगे।

यह सब झाडी के पीछे बैठी दोनों सहेलियां देख रही थी और चुपके से रानी पारी की छड़ी लेने के लिए पेड़ पर चढ़ जारी है। चढ़ने के बाद एक सहेली कौए को पकड़कर उसकी चोंच से जादुई छड़ी छीन लेती है और फिर दोनों सहेलियां मिलकर उस कौए की गर्दन मरोड़ कर मार डालती है। इसके बाद ओ इस छड़ी को लेकर रानी परी के पास जाती है और उन्हें उनका जादुई छड़ी दे देती है।

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यह देख जादूगरनी कहती है :- अरे ये क्या ? इस लड़की ने तो हमारा सारा खेल बिगड़ दिया।

जादुई छड़ी मिलने के बाद रानी पारी उन जादूगरनियों से कहती है। मेरी बात धयान से सुनो “बुराई चाहे जितनी भी कोशिश करले, लेकिन वह अच्छाई से कभी नहीं जित सकती। ” चलो अब तुम सब मरने के लिए तैयार हो जाओ। इतना कह कर रानी परी अपनी जादुई छड़ी स उन जादूगरनियों के ऊपर बड़े बड़े आग के गोले बरसाने लगती है , लेकिन जादूगरनियाँ अपनी साड़ी शक्ति लगा कर उससे बचने की कोसिस करती। लेकिन ओ रानी परी से हार जाती है और देखते ही देखते सभी जादूगरनियों के साथ साथ बस्ती भी जलकर राख हो जाती है। जादूगरनियों को हराने के बाद रानी परी उन दोनों सहेलियों से कहती है तुम दोनों बहुत बहादुर हो , आज तुम दोनों की मदद से इन दुष्ट जादूगरनियों को उनके किये की सजा मिल पायी है। इसलिए मैं तुम दोनों से बहुत खुश हूँ। इतना कह कर रानी परी उन दोनों को ढेर सारे सोने के सिक्के देकर वहां से बिदा कर देती है। दूसरी तरफ रानी पारी की तीनो बेटियां भी हसी ख़ुशी अपने ससुराल वहाली जाती है।

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